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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डेटा विश्लेषण और रिसर्च पेपर लेखन पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

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आईसीएमआर-डीएचआर के सहयोग से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, देशभर के चिकित्सा संस्थानों से पहुंचे 30 प्रतिभागी

शोधकर्ताओं को सांख्यिकीय विश्लेषण, वैज्ञानिक लेखन, पब्लिकेशन एथिक्स और जर्नल चयन का दिया गया प्रशिक्षण

अरविन्द पाण्डेय

कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) की ओर से भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), नई दिल्ली के सहयोग से ‘डेटा इंटरप्रिटेशन एंड मैन्युस्क्रिप्ट राइटिंग’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। 10 और 11 सितंबर को आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय काला ने किया।

इस अवसर पर उप-प्रधानाचार्या एवं एमआरयू की नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा गिरि, प्रोफेसर एवं को-नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ अग्रवाल, प्रोफेसर एवं को-नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह, एमआरयू के वैज्ञानिक डॉ. शशांक सहित पूरी टीम मौजूद रही। कार्यशाला में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के अलावा एमआरएचआरयू लखनऊ, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ, राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज और उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूपीयूएमएस) सैफई से कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को बायोमेडिकल शोध के आंकड़ों की सही व्याख्या, सांख्यिकीय विश्लेषण, वैज्ञानिक शोध-पत्र तैयार करने और प्रकाशन संबंधी नैतिक मानकों की व्यावहारिक जानकारी देना रहा। विशेषज्ञों ने व्याख्यान के साथ समूह अभ्यास और प्रायोगिक लेखन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।

विशेषज्ञ वक्ताओं डॉ. धीरज शाह, डॉ. आमिर मारूफ खान, डॉ. देवेंद्र मिश्रा और डीएचआर-नई दिल्ली की सीएमआईयू की साइंटिस्ट-सी डॉ. दीपिका ने विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को डिस्क्रिप्टिव स्टैटिस्टिक्स, विभिन्न समूहों की तुलना, कोरिलेशन, डायग्नोस्टिक एक्यूरेसी, टेबल और ग्राफ तैयार करने के साथ शोध-पत्र के इंट्रोडक्शन, मेथड्स, रिजल्ट्स और डिस्कशन हिस्से लिखने की जानकारी दी गई।

इसके अलावा PubMed के माध्यम से वैज्ञानिक साहित्य खोजने, उपयुक्त जर्नल चुनने, लेखकों की भूमिका निर्धारित करने, संदर्भ देने, वैज्ञानिक कदाचार से बचने, थीसिस और रिसर्च मैन्युस्क्रिप्ट के अंतर, समीक्षकों की टिप्पणियों का जवाब देने तथा वैज्ञानिक अंग्रेजी को बेहतर बनाने पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. संजय काला ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाला शोध और उसका वैज्ञानिक प्रकाशन अकादमिक उत्कृष्टता के साथ साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से नैतिक शोध को बढ़ावा देने और ऐसे वैज्ञानिक प्रकाशन तैयार करने का आह्वान किया, जिनका चिकित्सा क्षेत्र में व्यावहारिक प्रभाव हो।

एमआरयू के अधिकारियों ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में शोध क्षमता को मजबूत करने और उत्तर प्रदेश में संस्थानों के बीच सहयोगात्मक वैज्ञानिक कार्य को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। कार्यशाला के समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। साथ ही गुणवत्तापूर्ण बायोमेडिकल शोध और वैज्ञानिक लेखन को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

 

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